Monday, January 9, 2012

चंद लम्हे

चंद लम्हे ही सही तेरा -मेरा साथ चले ,
जब भी यारों में चले , तेरी-मेरी बात चले ।
लोग हँसते रहें , खामोश हम अकेले में ,
देखते जाएँ जो तूफ़ान और बरसात चले ।
बस एक बार ठहर जाओ मेरी बाहों में
अब्र में चाँद जो चाहे तो सारी रात चले ।
और बब्बर तुम्हें क्या चाहिए जमाने में
जब तलक चल सके ये पागले हालात चले ।

2 comments: